स्वामी विवेकानन्द और गाँधी जी का राजनीतिक चिन्तन

  • डाॅ0 सुरेन्द्र सिंह जे0एल0एन0 काॅलेज, एटा (उ0प्र0)

Abstract

स्वामी विवेकानन्द की विचारधारा मूलतः आध्यात्मिक मूल्यों में प्रभावित थी। उनके अंतःकरण मंे स्वार्थ जैसी अमानवीय मान्यताओं के लिए स्थान नहीं था। वे ऐसी राजनीति के विरोधी थे जिससे लोककल्याण की मर्यादा उपेक्षित हो। वे प्रमुख रूप से धार्मिक व्यक्ति थे जिसका लक्ष्य भारत का आध्यात्मिक तथा नैतिक पुनरुत्थान करना तथा भारतीय संस्कृति के आदर्षपरक मूल्यों की स्थापना करना था। आदर्ष राज्य की स्थापना के लिए उन्होंने विभिन्न वर्णों के राज्य कार्याें में असमानता का उल्लेख किया। स्वामीजी ने वर्ण-व्यवस्था का ऐतिहासिक विष्लेषण करते हुए कहा कि मानव समाज के चारों वर्ण-ब्राह्मण अथवा पुरोहित वर्ग, क्षत्रिय अथवा सैनिकवर्ग, वैष्य अथवा व्यापारी वर्ग तथा शूद्र अथवा सेवक वर्ग बारी-बारी से राज्य करते हैं।

Downloads

Download data is not yet available.
Published
2018-04-11
Section
Articles