स्वामी विवेकानन्द एवं महात्मा गाँधी में वैचारिक समानता

  • डा0 मन्जु सिंह1 1 प्रवक्ता - संस्कृत, राजकीय महाविद्यालय कासगंज।
  • और रेनू सिंह2 2 शोधछात्रा, इलाहाबाद विश्वविद्यालय इलाहाबाद।

Abstract

स्वामी विवेकानन्द एवं महात्मा गाँधी ये दो नाम सुनते ही हमारे सम्मुख दो आकृतियाँ उपस्थित होती हैं - एक तेजस्वी, कषायवस्त्रधारी, सुदर्शन युवा सन्यासी की तो दूसरी ऐनक लगाए, धोती मात्र पहने, हाथ में लाठी लिए दुर्बल वृद्ध व्यक्ति की। इनकी शारीरिक सादृश्यता में भले ही विपरीतता अनुभव हो किन्तु इनके वैचारिक दृष्टिकोण में अद्भुत समानता दृष्टिगोचर होती है। धार्मिक, राजनैतिक, शैक्षिक, आर्थिक एवं सामाजिक क्षेत्र में दोनों ही महान् युगपुरूषों में वैचारिक साम्य दर्शनीय है। वस्तुतः इसका कारण है भारतीय संस्कृति, भारत-भूमि एवं भारतीय जन समुदाय के प्रति इनका अगाध प्रेम एवं करूणा, साथ ही पराधीन भारत को स्वतन्त्र कराने की उत्कट लालसा। जिस प्रकार दो नदियाँ पृथक्-पृथक् मार्ग से प्रवाहित होती हैं किन्तु उनका लक्ष्य समुद्र-समागम होता है उसी प्रकार अलग-अलग व्यक्तित्व के स्वामी दोनों महानआत्माओं का लक्ष्य था भारतीय जनता को विविध दुःखों, कष्टों से मुक्ति दिलाना।

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Published
2018-04-11
Section
Articles