भारतीय ग्रामीण बाजार (वैश्वीकरण के सन्दर्भ में चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ)

  • डॉ. उमेश .तिवारी

Abstract

आज भारतीय ग्रामीण बाजार भी सूचना प्रौद्योगिकी, सेवा, कृषि, उद्योग तथा व्यापारिक मामलों समेत अनेक ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ ग्रामीण बाजार की आवश्यकता महसूस की जा रही है। भारतीय ग्रामीण बाजार का बदलता स्वरूप अब कच्चे माल के स्रोत के तौर पर नहीं बल्कि विश्व के शहरों से मुकाबला करने को तैयार बैठे हैं। सस्ता श्रम बल, सस्ती संरचना, सस्ता परिवहन व्यय आदि कुछ ऐसी विशेषताएँ हैं कि अब वैश्विक उद्योग जगत भारतीय ग्रामीण बाजारों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।

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Published
2018-05-28
Section
Review Article