भारत में उच्च शिक्षा की स्थिति: एक समीक्षा

  • डाॅ0 प्रियंका बी0 आर0 ए0, बिहार विश्वविद्यलाय, मुजफ्फरपुर, बिहार

Abstract

शिक्षा का मानव के जीवन में जो महत्व है वह अतुलनीय है। शिक्षा का एक स्वच्छ समाज के निर्माण में अति महत्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षा के बिना एक स्वच्छ एवं अनुकरणीय समाज की कल्पना भी नहीं का सकती है। प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा में नामांकन होता है जो प्रायः छात्रों की इच्छानुसार होता है। उच्च शिक्षा विश्वविद्यालयों, व्यावसायिक विश्वविद्यालयों, प्रौद्योगिकी संस्थानों आदि के द्वारा दी जाती है। हमारा देश भारत उच्च शिक्षा में प्राचीन काल से ही अग्रणी रहा है। यहाँ के नालंदा एवं तक्षशिला विश्वविद्यालय का प्राचीन काल में अद्वितीय स्थान था जहाँ चीन, तिब्बत, इंडोनेशिया, फारस, जापान से भी छात्र पढ़ने आते थे। परंतु आज की स्थिति कुछ और ही है। राष्ट्रीय मूल्यांकन व प्रत्यायन परिषद् (नैक) का शोध बताता है कि देश के 90 प्रतिशत काॅलेजों एवं 70 प्रतिशत विश्वविद्यालयों का स्तर बेहद कमजोर है। आजादी के बाद जिस रफ्तार से देश की शिक्षा को आगे बढ़ना चाहिए वह नहीं हो रहा। ऐसे में महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों की संख्या कई गुना बढ़ गई है। तकनीकी काॅलेजों और संस्थानों की संख्या भी बढ़ गई है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या में भी अच्छी खासी वृद्धि हुई है। लेकिन इस विस्तार के बावजूद हमारी शिक्षा गुणात्मक दृष्टि से अभी भी बहुत पिछड़ी हुई है।

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Published
2018-08-16
Section
Articles