भारत के आर्थिक विकास में मनोविज्ञान की भूमिका

  • अर्चना मिश्रा
  • डॉ जितेन्द्र उपाध्याय

Abstract

किसी भी देश क्षेत्र या व्यक्तियों की आर्थिक संवृद्धि को आर्थिक विकास कहते हैं। किसी भी नीति निर्माण की दृष्टि से आर्थिक विकास उन सभी प्रत्यनो को कहते हैं। जिनका लक्ष्य किसी भी जन समुदाय की आर्थिक स्थिति व जीवनस्तर के सुधार के लिए अपनाए जाते हैं। वर्तमान समय की सबसे महत्वपूर्ण समस्या आर्थिक विकास की समस्या है। किसी भी राष्ट्र क्षेत्र समुदाय वा परिवार का विकास वहाँ की आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है। जब तक हमारी आर्थिक स्थिति का विकास सही ढंग से नही होता हैं। तब तक हम सुख शांति एवं स्वतंत्रता का अनुभव नही कर सकते हैं। क्योंकि आर्थिक विकास एक प्रक्रिया है। जिसके द्वारा किसी अर्थ व्यवस्था की वास्तविक राष्ट्रीय आय में दीर्घकालिक वृद्धि होती हैं। आर्थिक विकास की इसी प्रक्रिया को यदि हम मनोवैज्ञानिक दृष्टि से दृष्टिगत करे तो हमें स्पष्ट रूप से दिखलाई देगा कि कोई भी व्यक्ति राष्ट्र समुदाय व क्षेत्र वहाँ की अर्थव्यवस्था से किस तरह से प्रभावित हो सकता हैं। या प्रभावित हो रहा है।

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Published
2018-05-28
Section
Articles