पण्डित दीनदयाल उपाध्यायः एकात्म मानव दर्शन तथा आर्थिक विचार

  • डॉ सौरभ वर्मा असिसटेंट प्रोफेसर, वाणिज्य विभाग, उपाधि महाविद्यालय, पीलीभीत

Abstract

पण्डित दीनदयाल उपाध्याय भारतीय दर्शन से उद्गमित राजनीति, अर्थनीति और समाजनीति के अतुलनीय संगम थे। पं0 दीन दयाल उपाध्याय के विचार राष्ट्रवाद और धर्म से अनुप्राणित हो सामाजिक उत्थान के अतिरिक्त गूढ़ आर्थिक बिन्दुओं पर भी स्पष्ट दृष्टिकोण व्यक्त करते हैं। वे उन दुर्लभ नेताओं में से थे जिन्होंने कथनी और करनी में सामंजस्य रखते हुए भारतीय राजनीति में सात्विकता को पल्लवित किया। उन्होंनें भारत की विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समस्याओं के उपचार में देशी औषधियों (भारतीय दर्शन) के प्रयोग की अवधारणा को विकसित किया। प्राचीन भारतीय सांस्कृतिक विचारधारा के आधुनिक अविष्कार के रूपृृृृ में सरल मानव दर्शन ‘‘एकात्म मानववाद’’ प्रस्तुत किया। दीनदयाल जी ने इस एकात्म मानववाद के विचारों को न केवल लेखों और भाषणों के माध्यम से प्रतिपादित किया वरन् अपने जीवन और कर्तृत्व में उसे आधार भी बनाया। इसीलिए वे राजनेता के साथ-साथ राज-ऋषि के रूप में स्थापित हैं।

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Published
2018-03-25
Section
Articles