एकात्म मानव दर्शन-अन्त्योदय

  • डॉ बनारसी मिश्रा रीडर, वाणिज्य विभाग, यू पी कॉलेज, वाराणसी

Abstract

एकात्म मानव दर्शन तथा अन्त्योदय का प्रणेता पं० दीनदयाल उपाध्याय जी’ को माना जाता है इसका उद्देश्य, “ऐसा स्वदेशी सामाजिक-आर्थिक मॉडल प्रस्तुत करना था, जिसका केन्द्र मानव था। भारत देश की स्वतन्त्रता से पहले देश में कई आन्दोलन हुए, कई प्रकार की नीतियाँ बनायी जाती थी, जगह-जगह विचार विमर्श किये जाते थे और इन सभी का एकमात्र लक्ष्य होता था- ’स्वतन्त्रता प्राप्त करना’। अथवा देश को स्वतन्त्र किस प्रकार कराया जाये। परन्तु जब देश स्वतन्त्र हो जायेगा तब देश संचालित किस प्रकार होगा? देशवासियों का विकास किस प्रकार होगा? मानव जीवन किस दिशा में अग्रसर होगा? आदि पहलुओं पर किसी भी प्रकार का कोई विचार-विमर्श नहीं किया गया और दिशाहीनता की स्थिति उत्पन्न हो गयी।

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Published
2018-03-25
Section
Articles