पंडित दीनदयाल जी, उनका एकात्म मानवदर्शन तथा प्रबन्धन

  • डॉ. अन्जू अवस्थी बृहस्पति परास्नातक कालेज, किदवई नगर, कानपुर।

Abstract

इतिहास में ऐसे कम ही मिलते हैं जिनका प्रभाव युगांतकारी रहा हो श्रद्धेय दीनदयाल उपाध्याय ऐसे ही युग पुरुष थे। उन्होने अपने विचारों तथा अपनी सरल सहज पद्धति से अपने युग को प्रभावित ही नही किया वरन आनी वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन भी किया। भारतीय राजनीति के उद्यान में 25 सितम्बर 1916 ई० को मथुरा में जन्मे दीनदयाल ऐसे वटवृक्ष के रुप में प्रकट हुये, जिसकी छाया की शरण राष्ट्रीय राजनीति समय-समय पर लेती रही। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जैसे बिरले ही नेता हुये होगे, जो भविष्य के गर्भ में इतनी दूर तक झांकने की क्षमता रखते हैं उपाध्याय जी स्वयं में अनेक विविधताओं का समेटे हुये थे। वे मूलतः एक शिक्षा बिन्दु, अनुसंधता, विचारक और एक सुधी लेखक भी थे। वह राजनीति को सरता का नही, सामाजिक परिवर्तन का साधन समझते थे। वह पक्के सिद्धान्तवादी थे और सिद्धान्त से हटना उन्हें किसी भी कीमत पर स्वीकार न था।

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Published
2018-08-18
Section
Articles