भारत की देशज शिक्षा प्रणाली और एकात्म मानववाद का दर्शन

  • रजनीश अग्रहरि सहायक प्रोफेसर (शिक्षा), दूर शिक्षा निदेशालय, म.गाँ.अ.हि.वि.वि. वर्धा

Abstract

किसी भी समाज एवं राष्ट्र के उन्नयन का मूल आधार शिक्षा में सन्निहित है। भारतीय संदर्भ में यह काफी व्यापक और जटिल भी है। प्राचीन काल से ही सम्पूर्ण विश्व के शिक्षा केंद्र के रूप में भारत विख्यात था। भारत में स्थापित नालंदा एवं तक्षशिला जैसे शिक्षा के केंद्र इस तथ्य को स्पष्ट रूप से उजागर करते है। डॉ. धर्मपाल ने अपनी पुस्तक ‘द ब्यूटीफुल ट्री’ में भारत की देशज शिक्षा प्रणाली का विस्तार से वर्णन किया है। भारत की प्राचीन शिक्षा अध्यात्मिकता पर आधारित थी। शिक्षा, मुक्ति एवं आत्मबोध के साधन के रूप में थी। यह व्यक्ति के लिये ही नहीं अपितु धर्म के लिये भी थी। भारत की शैक्षिक एवं सांस्कृतिक परम्परा विश्व इतिहास में प्राचीनतम है। डॉ॰ अल्टेकर के अनुसार

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Published
2018-08-18
Section
Articles