एकात्म मानव दर्शन, शिक्षा एवं शिक्षक

  • परशुराम यादव एम.ए., एम.एड., चन्दनपुर, कोल्हुई बाजार, महाराजगंज

Abstract

पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी द्वारा दिया गया एकात्म मानववाद का विचार व्यक्ति के सम्पूर्ण सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, एवं आध्यात्मिक पक्षों पर चिन्तन एवं मार्गदर्शन करता है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने मानव को एक बहुरंगी प्राणी के रुप में चित्रित किया है। उनके अनुसार व्यक्ति के किसी एक पक्ष या किसी एक ही आवश्यकता पर अत्याधिक बल देने से, तथा अन्य पक्षों की उपेक्षा करने से उसका जीवन सुखी एवं सन्तुष्ट होने के बजाय असन्तुष्ट एवं अप्रसन्नचित हो जाता है। इसलिए उन्होंने मनुष्य के सर्वांगीण विकास के लिए उसके सभी पक्षों, जैसे - धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष (सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, एवं आध्यात्मिक) सभी को विकसित करने का सुझाव अपने एकात्म मानव दर्शन के माध्यम से दिया है। शिक्षा एवं शिक्षक के सम्बन्ध में उपाध्याय जी ने शिक्षा को बालक के सर्वांगीण विकास का साधन माना है। उपाध्याय जी ने अपने शिक्षा सम्बन्धी विचार में एक समावेशी शिक्षा की रुपरेखा प्रस्तुत किया है इन्होने शिक्षक को एक मार्गदर्शक एवं पथ-प्रदर्शक के रुप में चित्रित किया है।

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Published
2018-08-18
Section
Articles