पंडित दीनदयाल जी का आर्थिक दर्शन

  • डॉ. आर.के. गुप्ता प्राचार्य, दुर्गा नारायण स्नातकोत्तर महाविद्यालय, फतेहगढ़, फर्रुखाबाद

Abstract

एकात्म मानववाद के प्रणेता निस्वार्थ व निष्ठा भाव से राष्ट्र सेवक अप्रतिम राष्ट्रभक्त पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी आधुनिक युग के महान कर्मयोगी एवं भौतिक चिंतक थे।
साम्राज्यवादी अंग्रेजों ने अपनी औद्योगिक क्रांति को सफल व साकार करने के लिए भारत के उत्पादन तंत्र को तोड़ मरोड़ दिया। उन्होंने अपने शासन एवं प्रशासन के संचालन के लिए भारत की भावी पीढ़ी को सृजनात्मक एवं उत्पादक अर्थ रचना से विरत कर नौकरी लोभी बनाया। भारतीय बाजार में प्राकृतिक संसाधनों का भयानक अवशोषण हुआ। ‘सोने की चिड़िया’ कहलाने वाला भारत कंगाल एवं दरिद्र बन गया। अर्थव्यवस्था के क्षेत्र नए नियामक सोवियत रूस की मार्गदर्शिकाओं का अनुगमन करते हुए पाश्चात्यों के दूसरे ’ध्रुव’ अर्थात समाजवादी रुझान वाले बन गए। पंचवर्षीय योजनाओं का खाका तैयार कर उनका क्रियान्वन हुआ। सहकारी खेती एवं उद्योगों के सरकारी करण का यह दौर अत्यधिक चुनौतीपूर्ण था।

Downloads

Download data is not yet available.
Published
2018-08-17
Section
Articles