एकात्म मानव दर्शन तथा आर्थिक विचार

  • डॉ. श्याम मिश्रा असिस्टेंट प्रोफसर, विद्या मंदिर डिग्री कॉलेज, कायमगंज, फर्रुखाबाद।

Abstract

आज के समाज का यह सही चित्रण है, जिसमे समाज नून, तेल लकड़ी की चिन्ता मे ही सुबह से शाम करते हुए दिन, महीने, और वर्ष बिताता हुआ अपने जीवन की घड़ियां काट जाता है। जीवन के शेष प्रश्न उसके सामने कभी प्रमुख रूप से आते ही नही। आयें भी तो वह उन्हें द्वितीय स्थान देता है ‘आधी पोटोबा मग विठोबा’ की मराठी उक्ति के अनुसार वह पहले भोजन और फिर भजन की चिन्ता करता है। और जब भोजन की चिन्ता में ही सब समय और शक्ति लग जाती है, तो भजन के लिए अवकाश ही कहाँ बचता है।

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Published
2018-08-17
Section
Articles