एकात्म मानव दर्शन तथा आर्थिक विचार-एक अध्ययन

  • डॉ. अखिलेश दीक्षित असिस्टेंट प्रोफेसर, आई.बी.एम., छत्रपति शाहूजी महाराज वि.वि.,कानपुर

Abstract

पंडित दीनदयाल उपाध्याय 20 वीं सदी के उत्तरार्ध के महापुरूष हैं, जब विश्व में अनेक विचार परम्पराएं बहुत प्रखरता से प्रचलित थीं। सोलहवीं शताब्दी के यूरोपीय पुनःजागरण के बाद की चार शताब्दियों में विचारों ने एक वैश्विक आयाम ग्रहण कर लिया था। साहसिक विश्वयात्रियों ने भू-पटल की परिक्रमा कर डाली थी। विज्ञानवाद, भौतिकवाद एवं मानव वाद ने ईश्वर की रहस्मय सत्ता को एक चुनौती दे दी थी। रहस्यात्मकता पर विज्ञान ने चोट की, श्रद्धामूलक आस्थाओं को तर्क ने हिला दिया तथा अब भवगवत्कृपा के स्थान पर विवेक का भरोसा हो चला था। ’थियोक्रेसी’ को चुनौती देते हुए सैक्युलरिज्म, लोकतंत्रात्मक व्यक्तिवाद व समाजवाद की धारणाएं प्रबल हो गई थीं।

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Published
2018-08-17
Section
Articles