अखंड भारतः ध्येय और साधन

  • डॉ. विनय कुमार चतुर्वेदी सहायक प्रोफेसर, एम.जी. ओपन हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा, महाराष्ट्र

Abstract

भारतीय जनसंघ ने अपने सम्मुख अखंड भारत का ध्येय रखा है। अखंड भारत देश की भौगोलिक एकता का ही परिचायक नहीं अपितु जीवन के भारतीय दृष्टिकोण का द्योतक है, जो अनेकता में एकता के दर्शन कराता है। अतः हमारे लिए अखंड भारत कोई राजनीतिक नारा नहीं जो परिस्थिति विशेष में जनप्रिय होने के कारण हमने स्वीकार किया हो, बल्कि यह तो हमारे संपूर्ण दर्शन का मूलाधार है। 15 अगस्त, 1947 को भारत की एकता के खंडित होने के तथा जन-धन की अपार हानि होने के कारण लोगों को अखंडता के अभाव का प्रकट परिणाम देखना पड़ा, और इसलिए आज भारत को पुनः एक करने की भूख प्रबल हो गई है। किंतु यदि हम अपनी युगों-युगों से चली आई जीवन-धारा के अंतःप्रवाह को देखने का प्रयत्न करें, तो हमें पता चलेगा कि हमारी राष्ट्रीय चेतना सदेव ही अखंडता के लिए प्रयत्नशील रही है तथा इस प्रयत्न में हम बहुत कुछ सफल भी हुए हैं।

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Published
2018-08-17
Section
Articles