पंडित दीनदयाल उपाध्याय एकात्म मानव दर्शन का महत्व

  • माधुरी दुबे एसोसिएट प्रोफेसर, राजनीतिक विज्ञान, बद्री विशाल कॉलेज, फर्रुखाबाद।

Abstract

पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक भारतीय विचारक, समाजशास्त्री, अर्थशास्त्री, पत्रकार व इतिहासकार थे। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष बने। दीनदयाल द्वारा स्थापित एकात्म मानव दर्शन की अवधारणा पर आधारित राजनीतिक दर्शन भारतीय जनसंघ की देन है। उनके अनुसार एकात्म मानव दर्शन प्रत्येक मनुष्य के शरीर मन बुद्धि और आत्मा का एक एकीकृत कार्य है। उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भारत पश्चिमी अवधारणाओं जैसे व्यक्ति वाद लोकतंत्र समाजवाद साम्यवाद और पूंजीवाद पर निर्भर नहीं हो सकता है। उनका विचार था कि भारतीय मेधा पश्चिमी सिद्धांत और विचारधाराओं से घुटन महसूस कर रही है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानव दर्शन सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक दोनों ही दृष्टि से एक सर्वकालिक एवं सार्वभौमिक जीवन दर्शन है। दर्शन के अनुसार मानव संपूर्ण ब्रह्मांड के केंद्र में रहकर एक सर्पिलाकार मंडल आकृति के रूप में अपने स्वयं के अस्तित्व क्रमशः परिवार, समुदाय, समाज, राष्ट्र एवं विश्व के प्रति अपने बहुपक्षीय उत्तरदायित्वों का निर्वहन करता हुआ प्रकृति के साथ एकीकृत हो जाता है।

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Published
2018-08-17
Section
Articles