एकात्म मानववाद

  • डॉ. ऋतंभरा अध्यक्ष, हिंदी विभागए ए.एन.डी. कॉलेज, कानपुर

Abstract

एकात्म मानववाद, मानव जीवन के संपूर्ण स्तर के संबंध का दर्शन है। एक विचारधारा है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने देश और दुनिया के सामने इस विचारधारा को प्रस्तुत किया, जब हमारा देश आजाद हुआ तब इस इस बात पर विवाद चल रहा था कि भारत पूंजीवाद को अपनाए या समाजवाद के रास्ते को। दोनों ही रास्तों को खोजने वाले विदेशी थे। उनके देश की परिस्थिति में यह विचार विकसित हुए थे। तब पंडित दीनदयाल जी ने कहा हमारी ऐसी कौन सी मजबूरी है कि हम विदेशी विचारधारा को ही चुने? जिन विचारधाराओं की बहस में एक भी भारतीय ना हो और ना ही हम उन परिस्थितियों में विकसित हुए हैं। उन्होंने हस्तक्षेप करते हुए भारतीय प्रजा को झकझोरा तथा आह्वाहन किया कि हम अपने पुरातन जीवन मूल्यों से युक्त रास्ते पर चलें और पूंजीवाद और साम्यवाद के स्थान पर एकात्मवाद सामने रखा।

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Published
2018-08-17
Section
Articles