एकात्म मानव दर्शन - एक सार्वभौमिक व्यावहारिक दर्शन

  • कुलदीप कुमार भारती प्रवक्ता, शिक्षाशास्त्र विभाग, बृहस्पति महिला महाविद्यालय, किदवई नगर, कानपुर

Abstract

पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक दार्शनिक, सामाजिक, राजनितिज्ञ और अर्थशास्त्री थे। इनके द्वारा प्रस्तुत दर्शन ‘एकात्म मानव दर्शन’ या ‘एकात्म मानववाद’ कहलाता है। एकात्म मानव दर्शन मानव जीवन और सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के एकमात्र सम्बन्ध का दर्शन है। एकात्म मानव दर्शन का उद्देश्य एक ऐसा ‘स्वदेशी सामाजिक एवं आर्थिक मॉडल’ समाज में दिखाना था, जिसमें विकास का केंद्र-बिंदु एकमात्र मानव हो। एकात्म मानव दर्शन के केंद्र में मानव, मानव से जुड़ा हुआ परिवार, परिवार से जुड़ा हुआ समाज फिर जाति फिर राष्ट्र फिर विश्व और फिर अनंत ब्रह्माण्ड आता है। उन्होंने एक जातिविहीन, वर्गविहीन और सामाजिक-संघर्षविहीन सामाजिक व्यवस्था पर जोर दिया था। उन्होंने एक ऊँच-नीच विहीन समाज की कल्पना की थी। एकात्म मानव दर्शन एकमात्र दर्शन है जिसमे मानव-मात्र हेतु अत्यंत गहन और समग्रता से चिंतन प्रस्तुत किया गया है।

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Published
2018-08-17
Section
Articles